"Bechara Nahi Samjhna" - Play by Visually Impaired Children

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play ‘Bechara nahi samajhna’Agra. After a long period of ‘confinement’, students of Surkuti, Keetham got a chance to interact with the world. Under the banner of ‘Antardrishti’, an NGO working for the empowerment of visually impaired, the special children staged a play ‘Bechara nahi samajhna’ at Youth hostel here on Saturday, which has raised a question over the attitude of the society and the government towards the visually impaired people. As the title of the play suggests, it was an effort to prove that the handicapped people are capable of doing wonders like any other normal person. It also tried to bring into notice the discrimination and neglect they are usually subjected to. During the programme, a collective call was made to the government to introduce welfare schemes for the special children. “They need to be looked upon as a part of the society and not as the ones who deserve sympathy and vocal concern,” said Shridhar, district secretary of National Federation of the Blind (NFB). He also condemned the delay on the part of the government in bringing into force the amendments that was made in All India Service Regulations, 1957, years ago. “Governments should enforce the amendments at the earliest besides providing three percent reservations to them in government services,” said Shridhar. The need to provide computer education to the visually challenged was also highlighted through the play so that they can rub shoulders with their counterparts in different fields. The programme was the joint effort of Antardrishti and Rajesh Bhardwaj, a Delhi based theater artist that resulted in much-needed exposure to them. For this, around a week long workshop was organised at Sur Kuti under the guidance of Bhardwaj. Akhil Srivastav of Antardrishti covened the programme. [Submitted by Administrator] |
Live performance on Universal Language of Dance and a lecture on Eye DonationAgra | 21 December 2008, A Lecture Demonstration on the universal language of dance & an Eye Donation lecture was organized for students at St John’s auditorium at 1230pm on 21 December 08 by Ms Romana Agnel, Director Cracovia Danza, an acclaimed exponent of 17th Century Baroque Dance & choreographer par excellence & Sanjib Bhattacharya, an accomplished Manipuri Dance artiste. The event was organized by St John’s College, Agra alongwith Antardrishti, a Social development organization promoting eye donation. Over 500 students, large number of distinguished scholars, Social workers like Mr Azhar Umri, Chairman NKAS, Mr Anil Arora, Dr Pushpa Srivastava, Dr RK Singh, Proctor Agra College and many Art lovers attended the programme. Dr Alok and Dr Shobha Sharma of St John’s College co-hosted the programme. The programme commenced with Akhil Srivastav, CEO, Antardrishti and Dr DJ Pandey, Head of Department, Ophthalmology, SN Medical College speaking at length about donation of eyes on death. Sanjib Bhattacharya volunteered to donate his eyes and over 350 students also pledged to donate their eyes for the noble cause. Ms Romana Agnel gave an insight to the rare Baroque dance that grew in the royal courts of Europe. She also performed two short dance renditions which were applauded by the audience. Her mastery of various European Classical dances and Classical Indian dances was visible, when she communicated with the students with ample illustrations of various styles and nuances of expression and the commonality of facial and hand gestures. The Lecture Demonstration highlighted the universal language of dance wherein Gestures/ Expressions can be used to communicate transcending the barrier of languages. Ms Roman Agnel was extremely pleased with the response of the students and expressed the desire to perform at Agra again. |
नेत्रदान को बढ़ावा देने हेतु पोस्टर का अनावरणआगरा । आज दिनांक 8 सितंबर 2008 को एन.सी.सी. के बच्चों ने राष्ट्रीय नेत्रदान दिवस के अवसर पर नेत्रदान को बढावा देने हेतु अंतरदृष्टि द्वारा तैयार किये गये पोस्टर का अनावरण किया। फतेहाबाद रोड स्थित कृष्णा कालेज में 10 दिनों तक चलने वाले एन.सी.सी. कैंप की शुरूआत बच्चों को नेत्रदान की महत्ता को समझाने के साथ हुई। कैंप की शुरूआत लेफ्टीनेन्ट कर्नल एस.एस. शर्मा ने की।अंतरदृष्टि, आई बैंक - एस.एन. मेडिकल कालेज आगरा और एन.सी.सी. ग्रुप आगरा के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरदृष्टि प्रमुख अखिल श्रीवास्तव ने बताया कि दृष्टिहीनता अपने आप में एक बहुत बड़ी समस्या है और इससे जितने ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके उतना अच्छा है, नेत्रदान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। संप्रेषण के विभिन्न माध्यमों को इस्तेमाल करते हुए पोस्टर के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जायेगी। इस अवसर पर डा. डी.जे. पांडे, विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, एस.एन. मेडिकल कालेज आगरा ने नेत्रदान की महत्ता को समझाते हुए बताया कि देश में नेत्रदान की बहुत कमी है। श्रीलंका जैसे छोटे से देश में इतना ज्यादा नेत्रदान होता है कि वहा से कोर्निया हमारे देश में आती है। जानकारी और जागरूकता के अभाव में हमारे देश में बहुत सारे लोग जिनको दृष्टिहीन होने से बचाया जा सकता है, दृष्टिहीन हो के जीवन व्यतीत करने को विवश है। आगे उन्होंने बताया कि अभी कृतिम कोर्निया का निर्माण नहीं हो पाया है तो इस लिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग नेत्रदान करे ताकि दृष्टिहीनों की एक बहुत बड़ी संख्या को अंधकार से रोशनी की तरफ लाया जा सके। अंत में सब लोगों को धन्यवाद देते हुए अखिल श्रीवास्तव ने उम्मीद जताई कि नेत्रदान के प्रति हम लोग न र्सिफ खुद जागरूक होगें बल्कि अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करें ताकि ज्यादा से ज्यादा दृष्टिहीनों के जीवन से अंधकार को मिटाया जा सके। कार्यक्रम में 600 से ज्याद कैडेटस और एन.सी.सी. के अधिकारियों के अलावा मुख्य रूप से अजहर उमरी,ऋषि, अमर, दिवाकर, अक्षय आदि उपस्थित थे। [Submitted by Administrator] |
2 Days workshop on development of Manual for Teachersआगरा । आज दिनांक 16 मई 2008 को सन फ्लावर पब्लिक स्कूल, दयाल बाग, आगरा में अध्यापको और बच्चों को आखों की समुचित देखभाल और दृष्टिहीनता से बचाव की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण पुस्तिका तैयार करने हेतु अंतरदृष्टि द्वारा एक दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया। विभिन्न स्कूलों से लगभग 40 अध्यापिकाओं ने इसमें भागीदारी करते हुए अपनें अनुभवों के माध्यम से प्रशिक्षण पुस्तिका की रूप-रेखा और मसौदे को अंतिम रूप दिया। कार्यशाला में मुख्य रूप से ऑंखों की महत्ता, समाज को ऑंखों के प्रति कैसे संवेदनशील किया जाय, अधंता से बचाव, अंधता की तरफ बढ़ने के लक्षण एवं इसकी पहचान के तरीके, हानिकारक तत्व एवं कृत्य, अंधता को प्रभावित करने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थितियॉं आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सहभागियों के स्वागत एवं संक्षिप्त परिचय के साथ शुरू हुई कार्यशाला में दृष्टिहीनता की समस्या एवं इससे बचाव की जरूरत पर जोर देते हुए अंतरदृष्टि प्रमुख अखिल श्रीवास्तव ने कार्यशाला के उद्देश्यों को विस्तार पूर्वक बताया । कार्यशाला का संचालन श्री धीरेन्द्र प्रताप सिंह और अखिल श्रीवास्तव ने किया । पहले दिन कार्यशाला में दृष्टिहीनता से बचाव में अध्यापकों की भूमिका, जागरूकता की जरूरत, जागरूकता के तरीके एवं उसमें शामिल होने वाले तत्वों पर विस्तार पूर्वक विचार-विमर्श हुआ । प्रशिक्षण पुस्तिका में शामिल किये जाने वाले तत्वों को चिन्हित करने के बाद दूसरें दिन उन पर विस्तार के साथ विचार-विमर्श हुआ । डा. समीर प्रकाश ने ऑंखों की देखभाल के साथ-साथ बच्चों में ऑखों संबन्धित बीमारियों तथा उनके पहचानने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि 12 साल की उम्र तक के बच्चों का विजन टेस्ट अनिवार्य होना चाहिए क्योंकि 12 साल की उम्र तक होने वाली बीमारियों पर आसानी से इलाज संभव है उसके बाद काफी परेशानियों को समाना करना पड़ सकता है। कार्यशाला के अंत में अंतरदृष्टि प्रमुख अखिल श्रीवास्तव ने सभी सहभागियों, डा. समीर प्रकाश एवं सन फ्लावर पब्लिक स्कूल के प्रबंधन, को धन्यवाद देते हुए कहा कि जुलाई में दुबारा से एक दिन की कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा जिसमें इस कार्यशाला के दौरान प्राप्त जानकारियों की मदद से तैयार प्रशिक्षण पुस्तिका को अंतिम रूप दिया जायेगा । |
World White Cane Day 2007आगरा। आज दिनांक 15 अक्टूबर को सांय 4.30 शहीद स्मारक पार्क में विश्व सफेद छड़ी सुरक्षा दिवस (वर्ल्ड ब्हाइट केन डे), राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ (आगरा) और अन्तरदृष्टि के तत्वाधान में संयुक्त रूप से मनाया गया। राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ (आगरा) के महासचिव श्री श्रीधर उपाध्याय ने कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए दृष्टिहीनों के जीवन में सफेद छड़ी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर चिन्ता प्रकट की दृष्टिहीनों की समस्याओं पर न तो सरकार ठीक तरह से ध्यान दे रही है और न ही समाज के लोग। अन्तरदृष्टि संस्था के प्रमुख श्री अखिल श्रीवास्तव ने इस दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिवस को मनाने का मुख्य उदेश्य लोगो में दृष्टिहीनों के प्रति जागरूकता पैदा करना और उन्हें इस बात के लिए प्रेरित करना कि जब भी वो किसी व्यक्ति को सफेद छड़ी के साथ सड़क पे चलते हुए या सड़क पार करते हुए देखे तो और अधिक सावधानी बरते। इस अवसर पर प्रमुख समाज सेवी कैप्टन व्यास चतुर्वेदी ने अन्तरदृष्टि संस्था द्वारा सफेद छड़ी सुरक्षा दिवस पर जारी किये गये पर्चे को पढ़ते हुए इस बात की जोरदार वकालत कि दृष्टिहीनों को समाज में बराबरी का दर्जा दिया जाना और उनको सम्मान की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। आगरा युनिवर्सिटी में कुर्सी बुनकर के पद पर कार्य कर रहे रघुनाथ जी ने बताया साधारणतया जब लोग किसी व्यक्ति को सफेद छड़ी के साथ देखते है, तो बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते है, जबकि यह छड़ी हमलोगों को आजादी के साथ चलने फिरने में मदद करती है। उन्होनें लोगों से यह अनुरोध किया जब भी वो किसी व्यक्ति को सफेद छड़ी के साथ देखे तो पर्याप्त सावधानी बरते ताकि हमारे जैसे अन्य दृष्टिहीन आसानी से चलफिर सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रामधनुष जी ने इस तरह के कार्यक्रमों में तेजी लाए जाने पर जोर दिया। अंत में धन्यवाद देते हुए श्री अजहर उमरी ने लोगो से आग्रह किया कि सफेद छड़ी दिवस के लिए तैयार किये गये पर्चो का वितरण करें। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुरेश, ऋषिराज सिंह, अजय, पप्पू, जितेन्द्र शर्मा, अमित शर्मा, नवीन सेमवाल आदि थे |
World Sight Day 2007आगरा। आज दिनांक 11 अक्टूबर 2007 को सांय 5.30 पर होटल गोवर्धन, दिल्ली गेट में विश्व नेत्र दिवस (वर्ल्ड साईट डे), के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन अन्तरदृष्टि द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. समीर प्रकाश ने दृष्टिहीनता के कारणो पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दृष्टिहीनता से बचाव के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतिवर्ष 11 अक्टूबर को विश्व नेत्र दिवस मनाया जाता है। अन्तरदृष्टि संस्था के प्रमुख अखिल श्रीवास्तव ने दृष्टिहीनों की तेजी से बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहां कि करीब 80 प्रतिशत दृष्टिहीन ऐसे है जिनके नेत्र इलाज द्वारा ठीक किए जा सकते है। उन्होंने बताया कि देशभर में चलाये जा रहे प्रयासों के बावजूद नेत्रदान की कमी और लोगों का अपनी ऑंखों के प्रति जागरूक न होने की वजह से आपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे है। एक अनुमान के मुतबिक देश में लगभग 30 लाख बच्चे ऐसे है जो कि कोर्निया खराब होने के कारण देख नहीं सकतें जबकि देश में लगभग 10000 बच्चों का ही कोर्निया बदला जा पा रहा है। अनुमानतः देश में प्रतिवर्ष 2.5 लाख नेत्रदान की जरूरत होती है जबकि देश में भर में फैले 109 आई बैंको के माध्यम से सिर्फ 25000 नेत्रदान ही हो पा रहे है। जिसमें 70 प्रतिशत ही इस्तेमाल योग्य रह जाती है। नेत्रदान की महत्ता पर जोर देते हुए आगरा काटूर्न फोरम के अध्यक्ष मनोहर गिडवानी जी ने बताया कि नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने में सामाजिक समस्याओं से जुड़े कार्टून एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि वो बहुत जल्द ही नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए drishtidaan.org नाम की एक वेबसाईट की शुरूआत आगरा कार्टून फोरम और अन्तरदृष्टि के सहयोग से करने जा रहे है। देश भर में चलाए जा रहे है सरकारी गैर सरकारी प्रयासों के बावजूद इतनी कम संख्या में नेत्रदान होने पर चिंता जताते हुए वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खण्डेलवाल ने सरकार से मांग की, कि नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने हेतु समय समय जागरूकता अभियान चालाये जाये और कैम्प लगा करा लोगों को नेत्रदान के प्रति न सिर्फ प्रेरित किया जाय बल्कि उनका नेत्रदान के लिए पंजीकरण भी किया जाये। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ समाज सेवी श्री सुरेन्द्र शर्मा ने इस तरह के कार्यक्रमों में निरन्तरता लाये जाने पर बल दिया और जनसामान्य से इस विषय की गंभीरता को समझते हुए आगे बढ़कर और ज्यादा भागीदारी सुनिश्च्ति करने की अपील की। अंत में संस्था प्रमुख अखिल श्रीवास्तव ने धन्यवाद देते हुए कहा कि अन्तरदृष्टि इस तरह के किसी भी कार्यक्रम का स्वागत करेगी और हर संभव सहयोग भी देगी। कार्यक्रम में अन्य लोगों के अलावा मुख्य रूप से जितेन्द्र शर्मा, तरून जैन, नवीन सेमवाल, मनोज सिंह, आदि की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। |
HelpLINE Inaugurationआगरा । उत्तर प्रदेश के नेत्रहीन मदद के लिए अब अपनी एक अदद लाठी (केन) पर आश्रित नहीं रहेंगे । आगामी 3 दिसंबर से अंतरदृष्टि उनके लिए एक हेल्पलाईन प्रारम्भ करने जा रही है । ये हेल्पलाईन सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं को नेत्रहीनों तक पहूंचायेगी जिसकी आवश्यकता उन्हें हर क्षण महसूस होती है । 3 दिसंबर को होने वाले 'विश्व विकलांग दिवस' की पूर्व बेला में आज यहां यूथ होस्टल में हुए एक सादे समारोह में उक्त हेल्पलाईन का उदघाटन करते हुए नेत्रहीन युवक श्रीधर उपाध्याय ने उम्मीद जताई की आगामी 3 दिसंबर से नेत्रहीनों के लिए एक नेत्र के रूप में 'अंतरदृष्टि हेल्पलाईन' उपलब्ध रहेगी जो उनके जीवन के घने अंधकार में प्रकाश पुंज की भूमिका अदा करेगी । इस अवसर पर अंतरदृष्टि के प्रमुख अखिल श्रीवास्तव ने बताया कि 'अंतरदृष्टि हेल्पलाईन' नेत्रहीनों, उनके परिजनों व परिचितों को, नेत्रहीनों को मिलने वाली सरकारी-गैरसरकारी सुविधाएं, उनके कानूनी अधिकार तथा उन व्यक्तियों, संस्थाओं और विशषज्ञों के बारे में व्यापक जानकारी देगी जो नेत्रहीनों के कल्याण और उत्थान के लिए कार्यरत है । साथ ही यह हेल्पलाईन चिकित्सकीय, शैक्षणिक और व्यवसायिक शिक्षाओं के बारे में भी जानकारी देगी । इस मौके पर बोलते हुए 'जिला सर्वशिक्षा अभियान' की विकलांगता समन्वयक श्रीमती शैलजा मिश्रा ने कहा कि 'अंतरदृष्टि' द्वारा शुरू की जी रही हेल्पलाईन से नेत्रहीनों को अपनी समस्याएं हल करने में काफी मदद मिलेगी, क्योकि सरकारी स्तर पर जानकारी प्राप्त करने में उनको काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ जाता है । 'अतरदृष्ट' प्रमुख के अनुसार संस्था आगरा के विभिन्न स्कूल कालेजों में छात्र-छात्राओं हेतु 'दृष्टिहीनता' विषय पर निंबध और पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित कर रही है । 3 दिंसबर से शुरू होने वाली इन प्रतियोगिताओं की प्रविष्टियां 15 दिंसबर तक संबंधित विद्यालय के प्राचार्य कार्यालय में जमा करायी जा सकती है । इन प्रतियोगिताओं के परिणाम 'विश्व ब्रेल दिवस' (4 जनवरी 2007) के अवसर पर घोषित किये जायेगें । ज्ञातव्य है कि आगरा की गिनती देश के उन जिलों में होती है जो नेत्रहीनता की समस्या से बुरी तरह जुझ रहे है । सन 2001 जनगणना के अनुसार देश मे नेत्रहीनता से जुझने वालों में सबसे ऊपर उत्तर चौबीस परगना (पश्चिम बंगाल) है, दूसरा स्थान कानपुर (उत्तर प्रदेश) का है और यदि प्रदेश में देखा जाए तो आगरा (लगभग साठ हजार) का नंबर कानपुर के फौरन बाद आता है । बावजूद इसके प्रदेश में सरकारी या गैर सरकारी स्तर पर ऐसा कोई केन्द्र नहीं है जहा पर नेत्रहीनो के लिए एकमुश्त सूचनाएं उपलब्ध हों । अभी अंतरदृष्टि हेल्पलाईन की सुविधा सोमवार से शुक्रवार प्रातः 11 से सांय 5 बजे तक फोन नंबर 9759134511 पर उपलब्ध रहेगी । कार्यक्रम में अन्य लोगो के अलावा डा. पुष्पा श्रीवास्तव, अजहर उमरी, अजय, सरनाम सिंह, मनोज गोयल, जितेन्द्र शर्मा, अम्बर द्विवेदी, योगेन्द्र दूबे, अनिल शुक्ल आदि भी उपस्थित थें । |
World White Cane Day 2006आगरा । 15 अक्टूबर 2006 । नेत्रहीनों को दया या रहम की नहीं, बल्कि अधिकारों की जरूरत है ताकि समाज में सम्मान और अधिकार के साथ आगे बढ़ सकें। यह विचार आज 'वर्ल्ड व्हाइट केन डे' पर 'अंतरदृष्टि' द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किये । दिल्ली से आये संजीव ने कहा कि नेत्रहीन बच्चों के भी सामान्य बच्चों जैसे मूलभूत अधिकार हैं किंतु दृष्टिहीनों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है । 'अंतरदृष्टि' का दृष्टिहीन बच्चों की शिक्षा के अलावा उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर खास जोर है । संस्था के प्रमुख अखिल श्रीवास्तव ने संस्था की कार्ययोजना के बारे में बताया कि नेत्रहीनों की सहायता के लिए शीघ्र ही एक हेल्पलाईन शुरू की जायेगी जो उनकी समस्याओं के समाधान में योगदान देगी । उन्होंने बताया कि इस बारे में कुछ नेत्र चिकित्सको से प्रारम्भिक बातचीत हो चुकी है । डी.पी.ई.पी. की विशेषज्ञा श्रीमती शैलजा मिश्रा ने बताया कि नेत्रहीनों के लिए आगरा जनपद के प्रत्येक ब्लॉक में एक लाइब्रेरी स्थापित करने की सरकार की योजना है । इन लाइब्रेरियों में ब्रेल में लिखी हुई पुस्तके उपलब्ध होगी । उन्होंने इस बार पर हैरानी जताई कि प्रदेश में नेत्रहीनों को पढ़ाने के लिए 800 शिक्षकों के पद रिक्त है लेकिन दूसरी खानापूरियों के चलते इन पदों पर शिक्षित नेत्रहीनों की नियुक्त नहीं कर पा रहीं है । श्री अभिषेक बंसल, एडवोकेट का कहना था कि नेत्रहीनों की मदद के लिए जो भी योजना बनाई जाये वह दीर्घ्रकालीन हों । संगोष्ठी में हिन्दुस्तान इंजिनियरिंग कालेज के प्रवक्ता डा. नवीन गुप्ता ने इस बात पर चिंता जताई कि विभिन्न नेत्रहीन स्कूलों में लड़कियों की सख्या नगण्य है । लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए । इसके लिए आम लोगो में चेतना जागृति करना जरूरी है । देहरादून से पधारे नेत्रहीन विद्यार्थी गोविंद ने नेत्रहीनों के सामने आने वाली कुछ व्यवहारिक समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि बैंक में किसी अनपढ़ व्यक्ति का एकाउन्ट तो खुल जाता है किन्तु एक शिक्षित नेत्रहीन को एकाउन्ट खोलने में तमाम दिक्कतें आती है, उन्होंने कहा कि समाज को नेत्रहीनों के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदलना चाहिए । प्रंबन्धन के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रों निहाल सिंह जैन ने कहां कि स्वयंसेवी संगठनों से नेत्रहीन बच्चों की शिक्षा के लिए स्कालरशिप प्राप्त करने के प्रयास किये जाने चाहिए । गोष्ठी में डा. पुष्पा श्रीवास्तव, योगेन्द्र दुबे, अनिल शुक्लृ मनोज शर्मा, मनोहर गिडवानी, डा. बचन सिंह सिकरवार, राघवेन्द्र तिवारी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये । |
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