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दृष्टिहीन बच्‍चों के लिए ब्रेल क्‍लास

Administrator Thursday 19 August 2010 - 16:49:26  

जी हॉं मै भी पढ़ सकती हूँ

''जी हॉं मै भी पढ़ सकती हूँ लोगों की भावनाओं को, उनके अनुभवों को, उनकी सफलताओं को, समाचार को और भी बहुत कुछ। मुझे भी लिखना आता है अपने विचारो को, अपनी भावनाओं को, मै भी लिख कर अपनी भावनाओं, विचारों को सभी लोगों के साथ बांट सकती हूँ और अपना योगदान दे सकती हूँ संसार को आगे बढ़ाने में, समाज को बेहतर बनाने में। आप सोच रहे होंगे कि इसमें कौन सी ऐसी नयी बात है जिसके लिए मैं उत्साहित हूँ - एक पढ़े-लिखे व्यक्ति से सब लोग इसी तरह की उम्मीद रखते है। लेकिन नहीं यहां पर एक बडा अंतर है - मैं दृष्टिहीन पैदा हुई थी। आज मै अगर ये सब कर पा रही हूँ तो सिर्फ इस लिए क्योंकि मैंने ब्रेल सीखी है।

ब्रेल सिस्टम एक तरह की लिपि है, जिसको दुनिया भर में नेत्रहीनों को पढ़ने और लिखने में छूकर व्यवहार में लाया जाता है। इसमें प्रत्येक आयताकार सेल में 6 डॉट्स होते हैं, जो थोड़े-थोड़े उभरे होते हैं। यह दो पंक्तियों में बनी होती हैं। इस आकार में अलग-अलग 64 अक्षरों को बनाया जा सकता है। सेल की बांई पंक्ति में उपर से नीचे 1,2,3 बने होते हैं। इसी तरह दांईं ओर 4,5,6 बनी होती हैं। एक डॉट की औसतन ऊंचाई 0.02 इंच होती है।

यदि देखा जाये तो ब्रेल दृष्टिहीनों के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के साथ-साथ उनमें कौशल तथा कुछ कर गुजरने की तमन्ना का मूल आधार बना हुआ है। जिन दृष्टिहीनों को ब्रेल अच्छी तरह से आती है उनकों जीवन के हर क्षेत्र में मदद मिलती है चाहे वो नौकरी कर रहे हो या पढ़ाई या फिर संगीत। ब्रेल आधारित बहुत सारे छोटे-छोटे उपकरण भी उपलब्ध है जिनका इस्तेमाल कही भी किया जा सकता है। चाहे वो नोट्स लेने में ही क्यो न हो। वास्तव में दृष्टिहीनों के जीवन में ब्रेल एक अहम स्थान रखती है। यह न सिर्फ उन्हें शिक्षित बनाती है बल्कि उन्हें आजादी का, बराबरी का भी एहसास कराती है। ब्रेल कुंजी है रोजगार की, आजादी की, और सफलता की। यह बहुत जरूरी है कि प्रत्येक ऐसे बच्चे को जो कि दृष्टिहीन है ब्रेल सिखाया जाय।

पिछले साल की तरह इस साल भी अंतरदृष्टि दृष्टिहीन बच्‍चों मुख्‍य रूप से लड़कियों के लिए ब्रेल की कक्षाओं की शुरूआत क्‍वीन विक्‍टोरिया गर्ल्‍स इंटर कालेज, हरी पर्वत आगरा में 25 अगस्‍त से करने जा रहा है। यदि आप किसी दृष्टिहीन को जानते है तो यह जानकारी उस तक पहुंचाने का कष्‍ट करें। यह इस लिए भी महत्‍वपूर्ण हो जाता है कि आगरा में दृष्टिहीन लड़कियों के लिए ब्रेल सिखाने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है इस कारण ज्‍यादातर लड़कियां पढ़ाई में पिछड़ जाती है।

दृष्टिहीन बच्‍चों के लिए ब्रेल क्‍लास
स्‍थान- क्‍वीन विक्‍टोरिया गर्ल्‍स इंटर कालेज, हरी पर्वत, आगरा
समय- 11:30 से 1 बजे तक , सोमवार से शुक्रवार तक


जो दृष्टिहीन लड़कियां / बच्‍चे ब्रेल सिखना चाहते है वो कृप्‍या 9412258575, 9358396846 पर संपर्क कर अपना लिखा दें।

सधन्‍यवाद

शिल्‍पी
अंतरदृष्टि
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अंतरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेन्‍डस ऑफ ब्‍लाइंड की बैठक

Administrator Thursday 19 August 2010 - 16:28:54  



आज दिनांक 8 अगस्‍त 2010 को अंतरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेन्‍डस ऑफ ब्‍लाइंड को गति देने हेतु दोपहर 3 बज कर 30 मिनट पर अंतरदृष्टि कार्यालय में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा की शुरूआत करते हुए श्रीधर उपाध्‍याय ने फोरम के गठन के बाद से लेकर अभी तक हुई गतिविधियों के बारे में जानकारी दी और आज की परिचर्चा के मुख्‍य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। रघुनाथ जी ने परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि फोरम की हर दूसरे महीने एक बैठक की जाये और हर बैठक में यह सुनिश्चित किया जाये की कम से कम 10 नये लोग जोड़े जाये और कोशिश की जाये कि ज्‍यादा से ज्‍यादा दृष्टिहीन भाईयों एवं उनके अभिभावकों को शामिल किया जाये। बैठक को शुरूआत में एक तय जगह पर किया जाये और जब सदस्‍य बढ़ जाये तो इसको अन्‍य जगहों पर भी किया जाये। फोरम के प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया का सहयोग लेने पर भी जोर दिया गया। फिरोजाबाद से आये विकास जैन ने फिरोजाबाद में भी फोरम की गतिविधियों की शुरूआत करने का सुझाव दिया, जिस पर सभी सहभागी सहमत थे और यह तय किया गया कि मथुरा में जयकरन और फिरोजाबाद में विकास के सहयोग से फोरम की एक बैठक जल्‍द ही बुलाई जायेगी। शिल्‍पी ने परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हम लोगों को दृष्टिहीन लड़कियों और उनके अभिभावकों को फोरम की बैठकों में शामिल करने की लिए दबाव बनाना चाहिए क्‍योंकि देखा यह जाता है कि दृष्टिहीन लड़कियों के लिए आगरा शहर में सुविधाएं बिल्‍कुल नहीं है और इस कारण वो समाज की मुख्‍य धारा से पूरी तरह से अलग हो जाती है। चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि फोरम की सदस्‍यता के लिए एक फार्म तैयार किया जाये और विधिवत रूप से इसका लेखा-जोखा रखा जाये। सदस्‍यता शुल्‍क और सदस्‍यता संबंधी अन्‍य बातो पर बातचीत अगली बैठक में किये जाने का प्रस्‍ताव पास हुआ। परिचर्चा में मुख्‍य रूप से श्रीधर उपाध्‍याय, रघुनाथ, राम धनुष, जयकरन, अमरीष पुरी, शिल्‍पी, विकास जैन (सभी दृष्टिहीन), के अलावा, मनोहर लाल गिदवानी, अंकित रतन, डा. अमर प्रकाश, जितेन्‍द्र, ए. बी. श्रीवास्‍तव, अजय आदि ने भाग लिया।
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Antardrishti Launches a forum for the friends of blind

Administrator Tuesday 23 February 2010 - 11:17:37  


Antardrishti, launched “antardrishti forum for friends of blind” on Sunday at the Youth Hostel, Agra. Two small children, Chunmun and Khushendra, both aged four years launched the forum by planting a tree at youth hostel. Both of them are blind from birth and learning Braille with the assistance of the Antardrishti.

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आगरा । आज दिनांक 21 फरवरी 2010 को 3 बजकर 30 मिनट पर ''अन्तरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेंण्डस ऑफ ब्लाइंड '' (Antardrishti Forum for Friends of Blind) की शुरूआत 4 वषीर्य दृष्टिहीनों बच्‍चों चुनमुन और खुशेन्‍द्र द्वारा पौधारोपड़ करके की गई। दोनों के परीवारी जनों के अलावा मुकेश जैन, डा अमर प्रकाश, श्रीधर उपाध्‍याय, शिल्‍पी, शिप्‍पी, आलोक कुलक्षेष्‍ठ ने पौधारोपड्र की प्रक्रियां में सहयोग किया । कार्यक्रम की शुरूआत दृष्ठिहीन बालिका मनीषा के गायन और सभागार मे उपस्थितजन के स्‍वागत के साथ हुई। तत्‍पश्‍चात ''अन्तरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेंण्डस ऑफ ब्लाइंड '' के गठन की पृष्‍ठभूमि को पढ़ कर सुनाने के साथ्‍ा ही पौधारोपड़ कर फोरम की शुरूआत की। इस अवसर पर वक्‍ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दृष्टिहीनों को समाज की मुख्‍यधारा से जोड़े बिना उनकों स्‍वावलम्‍बी नहीं बनाया जा सकता । दृष्टिहीनों को दया/दान की जरूरत नहीं है, उन्‍हें तो बस समान अवसर व कौशल की जरूरत है। सरकारी क्षेत्रों में तो आरक्षण की वजह से नौकरी मिल जाती है लेकिन निजी क्षेत्रों में दृष्टिहीनों के लिए रोजगार के अवसर न के बराबर है । जरूरत इस बात की है कि निजी क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसरों की संभावनाओं को तलाशा जाना चाहिए और जरूरत पढ़ने पर उपयुक्‍त प्रशिक्षण का भी इंतजाम होना चाहिए। दृष्टिहीनों के परीवारी जन, मित्रों, और हितेषीयों को एक मंच पे लाकर दृष्टिहीनों को समाज की मुख्‍यधारा से जोड़ने के उद्देश्‍य से गठित फोरम की शुरूआत पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करते हुए वक्‍ताओं ने यह उम्‍मीद की समाज के विभिन्‍न तबके के लोग भी इस मंच से न सिर्फ जुड़ेगें बल्कि भरपूर सहयोग भी देगें। कार्यक्रम के अंत में सभागार में उपस्थित जन से अपील की गई कि वह इस फोरम के सदस्‍य बनें और साथ ही साथ नेत्रदान का भी संकल्‍प ले ताकि काफी संख्‍या में दृष्टिहीनों की दृष्टि वापास आ सकें। लगभग 40 लोगों ने नेत्रदान का संकल्‍प लिया तथा यह उम्‍मीद की और भी लोग इस कार्य से जुड़ेगें। वक्‍ताओं में मुख्‍य रूप से श्रीधर उपाध्‍याय, जयकरन, शिल्‍पी, शिप्‍पी, मनोहर लाल गिदवानी, डा. अंनत बाजपेयी, मनीष, नरेन्‍द्र कुमार बघेल, ब्रजेश, डा. खिम्‍मनजी, भावना त्रिपाठी ने अपने विचार रखें। कार्यक्रम का संचालन रमेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम में मुख्‍य रूप से डा. पुष्‍पा श्रीवास्‍तव, डा. बचन सिंह सिकरवार, मंजू उपाध्‍याय, अजय, रफीक, उषा श्रीवास्‍तव, शिवशंकर, गया प्रसाद अनुरागी, रघुनाथ, रामधनुष, पन्‍नीराम, अमरीषपुरी आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
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''Antardrishti Forum for Friends of Blind '' का गठन होगा

Administrator Sunday 07 February 2010 - 21:23:25  

आगरा। आज दिनांक 7 फरवरी 2010 को अपरहान 3.30 पर अंतरदृष्टि द्वारा दृष्टिहीनों की समस्‍यओं और उनके समाधान पर एक परिचर्चा का आयोजन दिल्‍ली गेट स्थित गोवर्धन होटल में किया गया। श्री श्रीधर उपाध्‍याय (दृष्टिहीन) ने परिचर्चा के उद्देश्‍यों को बताते हुए कार्यक्रम की शुरूआत की। सहभागियों का स्‍वागत करते हुए उन्‍होंने कहा कि आगरा जैसे विकसित शहर में दृष्टिहीनों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। समाज या तो उन्‍हें दया का पात्र मानता है या फिर किसी काम का नहीं। पढ़ाई लिखाई हो जाने के बाद भी रोजगार के साधन लगभग न के बराबर है। जानकारी और संसाधनों तक पहुंच न होने के कारण भी दृष्टिहीनों के एक बड़े तबके को विभिन्‍न सरकारी - गैरसरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है, ऐसी स्थिति में किस तरह से बदलाव लाया जा सकता है को जानने के उद्देश्‍य से ही इस बैठक का आयोजन किया गया है।



परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए अखिल श्रीवास्‍तव ने कहा कि दृष्टिहीनों की वर्तमान स्थिति पर यदि एक नजर डाली जाये तो यह कहने में कोई संकोच नहीं होगा कि आजादी के 60 वर्षो के बाद भी दृष्टिहीनों को समाज की मुख्‍यधारा से जोड़ने में हम असफल रहें हैं। 30 प्रतिशत से भी ज्‍यादा दृष्टिहीन शहरी क्षेत्र में रहते है। यदि दृष्टिहीन विद्यालयों मे रहने वाले दृष्टिहीनों को छोड़ दिया जाये तो शायद ही आपको कभी कोई दृष्टिहीन सड़क पर चलते हुए या किसी सामाजिक गतिविधि में भाग लेते हुए मिले। कभी देखा है आपने इन्‍हें स्‍कूल, कालेज, बैंक, पोस्‍ट-ऑफिस या किसी अन्‍य सार्वजनिक सुविधाओं का इस्‍तेमाल करते हुए। क्‍या कारण है कि ये लोग शहर में रहते हैं, फिर भी दिखाई नहीं दे। ऐसा लगता है मानों किसी ने इनको समाज से काट कर अलग-थलग कर दिया हो। आज भी दृष्टिहीनों को समाज में दया या घृणा का पात्र माना जाता है।

दृष्टिहीनों को एक अशक्‍त वर्ग समझ कर दया और दान का पात्र समझा गया है। लेकिन सत्‍य यह है कि दृष्टिहीनों की आकांक्षाओं को न तो समाज ने और न ही सरकार ने सही रूप में समझा है। जहां समाज ने उन पर दया उड़ेंली है वही सरकारों ने उन्‍हें कुछ कामों तक ही सीमित कर दिया। हमारे लिए दृष्टिहीन न तो उपेक्षा के पात्र है और न दया किये जाने वाले 'बेचारे'। शरीर के दूसरे किसी भी रोग की तरह दृष्टिहीनता भी एक रोग है जिसके रोगी को उपेक्षा, घृणा और दया के बजाय सहयोग और बराबरी का भाव पैदा करने की जरूरत होती है। उन्‍होंने आगे कहा कि अंतरदृष्टि की यह स्‍पष्‍ट अवधारणा है कि दृष्टिहीनों के प्रति समाज को जागरूक बनाने के साथ ही साथ दृष्टिहीनों को समान अवसर और कौशल दिलाकर तथा उत्‍पादन की प्रक्रियाओं या उनके सक्रिय योगदान के लिए स्‍थान उपलब्‍ध कराके ही इन्‍हें समाज की मुख्‍यधारा से जोड़ा जा सकता है। साथ ही साथ यह भी जरूरी है कि समाज का वह तबका जो कि किसी न किसी रूप से दृष्टिहीनों के जीवन को प्रभावित करता है इनकी मौजूदगी को न सिर्फ स्‍वीकार करे बल्कि इनके साथ सम्‍मान व बराबरी का बर्ताव भी करें।

विगत 6 वर्षो से जारी अपने हस्‍तक्षेपों से प्राप्‍त अनुभवों का गहन विश्‍लेषण करने के बाद हमने एक ऐसे मंच की जरूरत महसूस की जहां पर दृष्टिहीनों के साथ - साथ उनके परीवारी जन, मित्र, व विभिन्‍न समुदाय के लोग आपस में विचार-विमर्श, अनुभवों का आदान-प्रदान व एक दूसरे को सहयोग के द्वारा दृष्टिहीनों की समस्‍याओं का न सिर्फ समाधान कर सके, बल्कि दृष्टिहीनों को समाज की मुख्‍यधारा से जोड़ सकें।
आगरा विश्‍वविद्यालय में कुर्सी बुनकर के पद पर कार्यरत रघुनाथ जी (दृष्टिहीन) ने भी आखिल श्रीवास्‍तव द्वारा कही गई बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वह भी पिछले कई सालो से इस तरह के एक मंच की कमी महसूस कर रहे थे, लेकिन सहयोग न मिल पाने के कारण्‍ा मंच का गठन नहीं कर पाये। परिचर्चा में उपस्थित सभी लोग इस बात से सहमत थे कि इस तरह के एक मंच की जरूरत है जो न सिर्फ उनकी समस्‍याओं का समाधान करने में उनकी मदद करे बल्कि उनको समाज में सम्‍मान और बराबरी का दर्जा दिला सके। मनोहर लाल गिदवानी ने इस बात पर खुशी जताते हुए कहा कि यह एक अच्‍छा कांसेप्‍ट होगा और इसकी जरूरत भी है, क्‍योंकि समाज में आज भी दृष्टिहीनों को दया का पात्र माना जाता है, यह फोरम समाज को इस बात के लिए जागरूक करने में सहायक होगा कि दृष्टिहीन दया के पात्र नहीं है बल्कि उनको सही प्रशिक्षण और मौंकों की जरूरत है ताकि वो भी आत्‍मनिर्भर हो सकें।

मंजू उपाध्‍याय (दृष्टिहीन) ने भी मंच बनाने की जरूरत पर बल दिया और कहां कि अभी तक आगरा में दृष्टिहीन लड़कियों के लिए किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं थी लेकिन अंतरदृष्टि द्वारा किये जा रहे प्रयासों से अब यहां की लड़कियां भी पढा़ई कर सकेंगी और इस मंच के माध्‍यम से अपनी समस्‍याओं का समाधान कर सकेगीं।

सिप्‍पी (दृष्टिहीन बालिका) ने इस बात पे खुशी जताई कि आज वो पहली बार अपने जैसे कई सारे दृष्टिहीनों के साथ बैठ के बात कर रही है और मंच के बनने की प्रक्रिया में वो भी शामिल है। उसके पिता श्री ब्रजेश जी ने कहां कि वो आगरा में पिछले 4 साल से रह रहे है लेकिन पहली बार उनहें किसी ऐसे कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला है जहां पर दृष्टिहीनों की भलाई के लिए बातचीत हो रहीं है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्‍होंने कहा कि आज उन्‍हें बहुत खुशी है कि उनकी बेटी को आगे बढ़ाने में वो अकेले नहीं है, पूरा समाज उनके साथ है।

इसके बाद मंच का नाम क्‍या हो इस पर चर्चा शुरू हुई और अखिल श्रीवास्‍तव ने एक नाम ''अन्‍तरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेंण्‍डस ऑफ ब्‍लाइंड '' (Antardrishti Forum for Friends of Blind) सुझाया, जिसका परिचर्चा में उपस्थित सभी लोगों ने स्‍वागत करते हुए कहां कि यही ठीक रहेगा। तत्‍तपश्‍चात फोरम का गठन कैसे हो, किन लोगो को इसमे शामिल किया जाये, कैसे काम करेगा आदि महत्‍वपूर्ण बातो पर यह तय किया गया कि जैसे - जैसे फोरम की गतिविधियां आगे बढ़ेगी इन प्रश्‍नों का भी जवाब मिलता जायेगा। इस बात पर सभी लोग एक मत थे कि फोरम में दृष्टिहीन और दृष्टि वाले दोनो ही तरह के लोगों को शामिल किया जायेगा और शुरूआत में फोरम का संचालन करने हेतु 9 लोगों की एक टीम बनाई जाये जिसमें 5 दृष्टिहीन और 4 सामान्‍य व्‍यक्तियों को शामिल किया जाये।

जयकरन (दृष्टिहीन) ने यह सुझाव रखा कि मंच में शामिल होने वाले सदस्‍यओं से कुछ न कुछ फीस अवश्‍य ली जाये, साथ में उन्‍होंने यह भी कहा कि जो सदस्‍य अपने पैरो पर खड़े हो चुके है उनहें यह जिम्‍मेदारी ज्‍यादा मजबूती से लेनी चाहिए ताकि दृष्टिहीनों को भी समाज की मुख्‍यधारा से जोड़ा जा सके। अम्‍बरीषपुरी (दृष्टिहीन) ने जयकरन की बातो से सहमती जताते हुए कहा कि किसी भी संगठन को चलाने के लिए पैसो की जरूरत होती है और हम लोगों को चाहिए कि स्‍वयं ही पैसों का इंतजाम करें बजाय इसके कि दूसरों से भीख मांगी जाये। उन्‍होंने यह भी कहां कि हम दृष्टिहीनों को दया और दान नहीं चाहिएं हमें चाहिए सही प्रशिक्षण और भेदभाव रहित समाज ताकि हम लोग भी आत्‍मनिर्भर हो सकें।

बातचीत के दौरान निम्‍न मुख्‍य उद्देश्‍य सामने आये -
  • संयुक्‍त बैठकों, गोष्ठियों, सेमीनार्स तथा कार्यशालाओं के माध्‍यम से संवाद कायम करना तथा -

  • आपस में अनुभवों का आदान-प्रदान एवं उसका विशलेषण

  • मुद्दों तथा पहल के क्षेत्रों को चिन्हित करना

  • भविष्‍य की योजनाओं पर विचार-विमर्श तथा उसे लागू करने हेतु कार्यक्रमों, गतिविधियों को अंतिम रूप देना

  • दृष्टिहीनता की समस्‍या तथा दृष्टिहीनों की समस्‍या के समाधान हेतु एक दबाव समूह के रूप में कार्य करना


आगामी 21 फरवरी 2010 को एक बड़ी बैठक बुला कर उसमें फोरम के गठन की घोषणा करने और विधिवत रूप से शुरू करने पर सहमति बनी और अंत में श्रीधर उपाध्‍याय ने सभी सहभागियों को धन्‍यवाद दिया।
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Braille class for Blind Girls in Agra by Antardrishti

Administrator Saturday 05 December 2009 - 06:57:00   0

आगरा। आज दिनांक 3 दिसंबर 2009 को अंतरदृष्टि द्वारा विश्‍व विकलांग दिवस के अवसर पर हरिपर्वत स्थित क्‍वीन विक्‍टोरिया गर्लस इंटर कालेज के रेड क्रास भवन में प्रातः 12 बजे दृष्टिहीन लड़कियों और बच्‍चों के लिए ब्रेल की कक्षाओं की शुरूआत हुई। इस अवसर पर श्रीधर उपाध्‍याय (दृष्टिहीन) ने दृष्टिहीन लड़कियों विकलांग दिवस के महत्‍व को समझाते हुए बताया कि यदि ठान लिया जाये तो कुछ भी असंभव नही हैं। कुछ पाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है और यह बात दृष्टिहीनों और अन्‍य विकलांगजनों पर भी लागू होती है। अंतरदृष्टि के अखिल श्रीवास्‍तव ने सभी सहभागियों का स्‍वागत करते हुए बताया कि ब्रेल दृष्टिहीनो को आत्‍मनिर्भर बनने में मदद करता है, साथ ही उन्‍होंने कहां कि दृष्टिहीन भी सामान्‍य लोगों की तरह अपना जीवन जी सकते है, बस जरूरत इस बात की है कि दृष्टिहीन पढ़ाई के साथ-साथ अपने व्‍यक्तिव का निर्माण भी करें ताकि समाज के अन्‍य लोगों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल सके।





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शिवानी (दृष्टिहीन) ने कहा कि एक सेंटर खोला जाना चाहिए जिसमें दृष्टिहीन युवक युवतियों को रोजगारोपयोगी प्रशिक्षण दिया जा सके। आज हमारे देश में विकलांगों को शिक्षा तो मिल रही है लेकिन रोजगार के अवसर उपलब्‍ध नहीं है। आगरा जिले में दृष्टिहीनों के लिए एक हास्‍टल खोले जाने की भी जरूरत महसूस की गई। यदि शहर में हास्‍टल होगा तो दृष्टिहीनों के लिए जो थोड़े बहुत अवसर अंतरदृष्टि के प्रयासों से उपलब्‍ध है उनका उपयोग हो सकेगा और दृष्टिहीनों को भी रोजगार मिल सकेगा। क्‍वीन विक्‍टोरिया गर्लस इंटर कालेज में दृष्टिहीन लड़कियों के ब्रेल की शिक्षा शुरू होने को स्‍वागत करते हुए शिल्‍पी (दृष्टिहीन) ने कहॅां कि आगरा में इसकी बहुत जरूरत थी, क्‍योंकि यहां पर लड़कियों के लिए किसी भी प्रकार की सुविधा उपलब्‍ध नहीं है। मंजू उपाध्‍याय (दृष्टिहीन) ने कहां कि आज दृष्टिहीन लड़किया सारा काम खुद से कर लेती है, चाहे खाना बनाना हो या पढ़ाई करना हो। उन्‍होंने साथ में भी यही सुझाव दिया की मीडिया के माध्‍यम से ज्‍यादा से ज्‍यादा दृष्टिहीन लड़कियों को इस तरह के कार्यक्रम से जोड़ा जाये ताकि उनकी भी पढ़ाई ठीक तरह से हो सके। शिवानी जिनकों क्रोशिया की बुनाई और खिलौनों को बनाने में दक्षता हासिल है अपनी बनाई हुई वस्‍तुओं को दिखाते हुए कहा कि आज उन्‍हें अपने जैसी दूसरी दृष्टिहीन ल‍ड़कियों से मिल कर बड़ी खुशी हो रही है और वो इन दूसरी ल‍ड़कियों को भी इस कला को सिखाना चाहेगी। उन्‍होंने क्रोशिया और उन के द्वारा गणेश जी, कृष्‍ण भगवान के लिए कपड़े, दूध की बोतल का कवर आदि को भी सबको दिखाया।



कार्यक्रम के अंत में श्रीधर उपाध्‍याय ने बताया कि कल से 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक हरिपर्वत स्थित क्‍वीन विक्‍टोरिया गर्लस इंटर कालेज के रेड क्रास भवन में दृष्टिहीन लड़कियों और बच्‍चों के लिए ब्रेल की कक्षाएं सोमवार से शुक्रवार तक चलेगी। जो दृष्टिहीन लड़कियां और बच्‍चे ब्रेल सिखना चाहते है वो कृप्‍या 09412258575, 09358396846 पर संपर्क कर अपना लिखा दें। तत्‍पश्‍चात अखिल श्रीवास्‍तव ने श्रीमति मीनाक्षी दास, प्रधानाचार्य, क्‍वीन विक्‍टोरिया गर्लस इंटर कालेज का आभार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना इस तरह के कार्यक्रम को करना लगभग असंभव सा था। अंत में उपस्थित लोगों का धन्‍यवाद देते हुए कहा कि अंतरदृष्टि के पास 18 से 30 वर्ष की आयु वाले दृष्टिहीनों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्‍ध है इच्‍छुक दृष्टिहीन 09412258575 पर संपर्क कर सकते हैं।
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Eye Care Manual @ Pithoragarh

Administrator Wednesday 11 November 2009 - 12:08:35   0


मूनकोट ब्‍लाक के एक स्‍कूल में आई केयर मैनुअल के प्रयोग को समझाते हुए देवेन्‍द्र पंत जी


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Poster Exhibition on Eye Donation prepared by Queen Victoria Girls Inter College, Agra's RED CROSS Students

Administrator Saturday 26 September 2009 - 07:07:21   0


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Visually Impaired Sridhar Upaddhaya enjoying the poster / slogan exhibition, along with Dr. Pushpa Srivastava, Mohd. Rafiq, facilitated by Mariam Qurashi student of Queen Victoria Girls Inter College, Agra

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Administrator Thursday 27 August 2009 - 13:43:28   0

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Eye Donation Workshop/ Meeting

Administrator Tuesday 25 August 2009 - 00:12:44   0


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play Bechara nahi samajhna

Administrator Monday 02 March 2009 - 12:03:03   0

Agra. After a long period of confinement, students of Surkuti, Keetham got a chance to interact with the world. Under the banner of Antardrishti, an NGO working for the empowerment of visually impaired, the special children staged a play Bechara nahi samajhna at Youth hostel here on Saturday, which has raised a question over the attitude of the society and the government towards the visually impaired people. As the title of the play suggests, it was an effort to prove that the handicapped people are capable of doing wonders like any other normal person. It also tried to bring into notice the discrimination and neglect they are usually subjected to.
During the programme, a collective call was made to the government to introduce welfare schemes for the special children. They need to be looked upon as a part of the society and not as the ones who deserve sympathy and vocal concern, said Shridhar, district secretary of National Federation of the Blind (NFB). He also condemned the delay on the part of the government in bringing into force the amendments that was made in All India Service Regulations, 1957, years ago. Governments should enforce the amendments at the earliest besides providing three percent reservations to them in government services, said Shridhar. The need to provide computer education to the visually challenged was also highlighted through the play so that they can rub shoulders with their counterparts in different fields. The programme was the joint effort of Antardrishti and Rajesh Bhardwaj, a Delhi based theater artist that resulted in much-needed exposure to them. For this, around a week long workshop was organised at Sur Kuti under the guidance of Bhardwaj. Akhil Srivastav of Antardrishti covened the programme.

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Antardrishti Forum for Friends of Blind

Recently a meeting was held at Goverdhan Hotel on 7 February 2010 to discuss the problems of visually impaired people, wherein it was unanimously decided to establish a forum designated as 'Antardrishti Forum for Friends of Blind' which shall address problem of the visually impaired and their seamless integration with the mainstream society.

We welcome your views and suggestions on the same. The forum is being formally launched on 21st February 2010 at Youth Hostel, Sanjay Place, Agra.

Concept note of the forum is available for your perusal in Hindi and English.
affb concept note Hindi
affb concept note English
Please feel free to share your valuable suggestions through email at affb@antardrishti.org as well.

Eye Care

The much awaited awareness manual for school teachers on children's eye care is now available in Hindi language and very soon we will be bringing out the English Manual as well. In this manual, we have incorporated the views and suggestion of teachers, ophthalmologist and instructors. We hope that this manual would serve the purpose of a useful training aid towards prevention of blindness amongst children.



If you, or anyone known to you, work with school (junior section) as a teacher/ principal/ manager or in any capacity and is willing to use this manual, please fill the form to obtain a copy of the manual.

Click on the Link
About the manual
Preview this manual online
Fill the form to obtain a copy
We would also like to request you to forward this message to everyone in your contact list. This way we can reach to a lot more of them.

Together we can bring a change in the life of Sunayana, a visually impaired............

Currently we are collecting information about visually impaired people in India to understand their situation in a comprehensive manner. This will help us to articulate and share plan and programs for their development.

If you know any visually impaired person and wish to support, kindly download the form and pass it on to him or her. If you find this cumbersome kindly fill the form on their behalf and send the detail by email at sunayana@antardrishti.org or by post to Antardrishti office.

The form is available at http://antardrishti.org/download.php?view.10.


We would also like to request you to forward this message to everyone in your contact list. This way we can reach to a lot more of them.

Theatre for Personality Development

We all know that theatre can play a big role in creating awareness and bringing social change. With this understanding we organized a theatre workshop for the visually impaired children not only to create awareness but also to provide them a tool for their own personality development. This was our first effort; there were barriers all around, but the kids were full of enthusiasm and vigour. They all did some hard work and came out with flying colours. We are planning to organize some more workshops with the visually impaired children and look forward to your comments and feedback sunayana@antardrishti.org. Join us to be part of such a process to bring change in the life of Sunayana; not one but many around us.

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