अन्तरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेंण्डस ऑफ ब्लाइंड |
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दृष्टिहीनों की वर्तमान स्थिति पर यदि एक नजर डाली जाये तो यह कहने में कोई संकोच नहीं होगा कि आजादी के 60 वर्षो के बाद भी दृष्टिहीनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में हम असफल रहें हैं। 30 प्रतिशत से भी ज्यादा दृष्टिहीन शहरी क्षेत्र में रहते है। यदि दृष्टिहीन विद्यालयों मे रहने वाले दृष्टिहीनों को छोड़ दिया जाये तो शायद ही आपको कभी कोई दृष्टिहीन सड़क पर चलते हुए या किसी सामाजिक गतिविधि में भाग लेते हुए मिले। कभी देखा है आपने इन्हें स्कूल, कालेज, बैंक, पोस्ट-ऑफिस या किसी अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए। क्या कारण है कि ये लोग शहर में रहते हैं, फिर भी दिखाई नहीं दे। ऐसा लगता है मानों किसी ने इनको समाज से काट कर अलग-थलग कर दिया हो। आज भी दृष्टिहीनों को समाज में दया या घृणा का पात्र माना जाता है। जानकारी और संसाधनों तक पहुंच न होने के कारण भी दृष्टिहीनों के एक बड़े तबके को विभिन्न सरकारी - गैरसरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है और उनके अथक प्रयास के बावजूद भी अभी तक हमारे देश में दृष्टिहीनों को मुख्य धारा में जोड़ने की योजनाए आपेक्षित सफल नहीं हो पाई है। इस बात में कोई शक नहीं होना चाहिए कि इन सामूहिक प्रयासों की वजह से ही स्थिति में पहले की तुलना में कुछ बदलाव देखने को मिलता है। अभी तक दृष्टिहीनों को एक अशक्त वर्ग समझ कर दया और दान का पात्र समझा गया है। लेकिन सत्य यह है कि दृष्टिहीनों की आकांक्षाओं को न तो समाज ने और न ही सरकार ने सही रूप में समझा है। जहां समाज ने उन पर दया उड़ेंली है वही सरकारों ने उन्हें कुछ कामों तक ही सीमित कर दिया। हमारे लिए दृष्टिहीन न तो उपेक्षा के पात्र है और न दया किये जाने वाले 'बेचारे'। शरीर के दूसरे किसी भी रोग की तरह दृष्टिहीनता भी एक रोग है जिसके रोगी को उपेक्षा, घृणा और दया के बजाय सहयोग और बराबरी का भाव पैदा करने की जरूरत होती है। अंतरदृष्टि की यह स्पष्ट अवधारणा है कि दृष्टिहीनों के प्रति समाज को जागरूक बनाने के साथ ही साथ दृष्टिहीनों को समान अवसर और कौशल दिलाकर तथा उत्पादन की प्रक्रियाओं या उनके सक्रिय योगदान के लिए स्थान उपलब्ध कराके ही इन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। साथ ही साथ यह भी जरूरी है कि समाज का वह तबका जो कि किसी न किसी रूप से दृष्टिहीनों के जीवन को प्रभावित करता है इनकी मौजूदगी को न सिर्फ स्वीकार करे बल्कि इनके साथ सम्मान व बराबरी का बर्ताव भी करें। विगत 6 वर्षो से जारी अपने हस्तक्षेपों से प्राप्त अनुभवों का गहन विश्लेषण करने के बाद हमने एक ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत महसूस की जहां पर दृष्टिहीनों के साथ - साथ उनके परीवारी जन, मित्र, व विभिन्न समुदाय के लोग आपस में विचार-विमर्श, अनुभवों का आदान-प्रदान व एक दूसरे को सहयोग के द्वारा दृष्टिहीनों की समस्याओं का न सिर्फ समाधान कर सके, बल्कि दृष्टिहीनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ सकें। दृष्टिहीनों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने व सम्मान व बराबरी का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से ''अन्तरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेंण्डस ऑफ ब्लाइंड '' (Antardrishti Forum for Friends of Blind) का गठन किया गया। फोरम की कोशिश होगी संयुक्त बैठकों, गोष्ठियों, सेमीनार्स तथा कार्यशालाओं के माध्यम से संवाद कायम करना तथा -
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